पंजाब में शिशु मृत्यु दर लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2024 में राज्य में शिशु मौतों की संख्या 2,671 तक पहुंच गई, जो 2023 के मुकाबले 17.56% अधिक है। नागरिक पंजीकरण प्रणाली (CRS) की महत्वपूर्ण सांख्यिकी रिपोर्ट 2024 के अनुसार सबसे ज्यादा शिशु मौतें अमृतसर में दर्ज की गईं, जबकि जालंधर और लुधियाना भी सबसे अधिक प्रभावित जिलों में शामिल हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2020 में 1,884, वर्ष 2021 में 1,830, वर्ष 2022 में 2,336 और वर्ष 2023 में 2,272 शिशुओं की मौत हुई थी। विशेषज्ञों के अनुसार समय से पहले जन्म, जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी, संक्रमण, प्रसवपूर्व देखभाल की कमी, कुपोषण, खराब स्वच्छता और दस्त जैसी समस्याएं शिशु मृत्यु के प्रमुख कारण हैं।
राज्य में ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी इलाकों की स्थिति अधिक गंभीर बनी हुई है। वर्ष 2024 में गांवों में 258 शिशु मौतें दर्ज की गईं, जबकि शहरों में 2,413 बच्चों की मौत हुई। यानी कुल मामलों में करीब 90 प्रतिशत मौतें शहरी क्षेत्रों में हुईं।
जिलावार आंकड़ों में अमृतसर सबसे ऊपर रहा, जहां 835 शिशुओं की मौत दर्ज की गई। इसके बाद जालंधर में 368, लुधियाना में 348 और पटियाला में 331 बच्चों की मौत हुई। इन जिलों में स्वास्थ्य विभाग ने विशेष निगरानी बढ़ाते हुए अस्पतालों में सुविधाओं का विस्तार, डॉक्टरों और स्टाफ की तैनाती तथा जागरूकता अभियान तेज करने की बात कही है।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जिला अस्पतालों, सब-डिवीजनल अस्पतालों और कम्युनिटी हेल्थ सेंटरों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति की जा रही है। साथ ही प्रसवपूर्व देखभाल को बेहतर बनाने, कुपोषण कम करने, स्वच्छता सुधारने और संक्रमण की रोकथाम के लिए कई योजनाओं पर काम चल रहा है।
वहीं, राष्ट्रीय स्तर पर तस्वीर अलग है। पूरे देश में वर्ष 2024 के दौरान शिशु मृत्यु दर में 17.12% की कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2023 में जहां लगभग 1.45 लाख शिशुओं की मौत हुई थी, वहीं 2024 में यह संख्या घटकर करीब 1.20 लाख रह गई।



