Sunday, November 8, 2026
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रेयर अर्थ के खेल में China का पतन तय! America ने भारत को भेजा खास बुलावा

चीन की ‘खनिज-बादशाहत’ को खत्म करने के लिए अमेरिका ने बड़ा दांव चला है.

आज के दौर में आपकी जेब में रखे स्मार्टफोन से लेकर देश की सुरक्षा में तैनात फाइटर जेट तक, हर आधुनिक तकनीक की जान ‘क्रिटिकल मिनरल्स’ यानी रेयर अर्थ (rare earth elements) में बसती है. इसी तकनीक की दुनिया में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है. अमेरिका ने चीन की बादशाहत को चुनौती देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेमेंट ने पुष्टि की है कि वाशिंगटन में होने वाली G7 देशों के वित्त मंत्रियों की अहम बैठक में भारत और ऑस्ट्रेलिया को भी आमंत्रित किया गया है. सोमवार को होने वाली इस बैठक का मुख्य एजेंडा स्पष्ट है, दुनिया भर में महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन को सुरक्षित करना और किसी एक देश पर निर्भरता खत्म करना.

वाशिंगटन में बन रही है नई रणनीति

इस बैठक की मेजबानी खुद अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेमेंट कर रहे हैं. उन्होंने एक साक्षात्कार में बताया कि वे पिछले साल गर्मियों में हुए G7 शिखर सम्मेलन के बाद से ही इस मुद्दे पर अलग से चर्चा करने का दबाव बना रहे थे. हालांकि, वित्त मंत्रियों ने दिसंबर में एक वर्चुअल बैठक की थी, लेकिन अब यह आमने-सामने की चर्चा ज्यादा गंभीर मानी जा रही है.
बेमेंट ने साफ किया कि भारत को इस बैठक के लिए विशेष तौर पर न्योता भेजा गया है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि भारत ने इस निमंत्रण को स्वीकार किया है या नहीं. यह निमंत्रण इसलिए भी खास है क्योंकि G7 समूह (जिसमें अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, फ्रांस, जर्मनी, इटली और कनाडा शामिल हैं) अपनी जरूरतों के लिए अब तक काफी हद तक चीन पर निर्भर रहा है. अब ये देश चाहते हैं कि भारत जैसे साझेदार इस निर्भरता को कम करने में मददगार बनें.

रेयर अर्थ पर चीन का दबदबा

इस पूरी कवायद के पीछे की असली वजह चीन का ‘रेयर अर्थ एलिमेंट्स’ (rare earth elements) और क्रिटिकल मिनरल्स पर एकतरफा नियंत्रण है. अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति की गंभीरता समझ आती है. कॉपर, लिथियम, कोबाल्ट, ग्रेफाइट और रेयर अर्थ की रिफाइनिंग में चीन की हिस्सेदारी 47% से लेकर 87% तक है.
ये खनिज केवल बैटरियों या रिन्यूएबल एनर्जी के लिए ही नहीं, बल्कि सेमीकंडक्टर और रक्षा उपकरणों के निर्माण के लिए भी बेहद जरूरी हैं. हाल के दिनों में पश्चिमी देशों की चिंता तब और बढ़ गई जब चीन ने जापान को रेयर अर्थ और चुम्बकों के निर्यात पर पाबंदियां लगानी शुरू कर दीं. साथ ही, जापानी सेना के लिए दोहरे उपयोग वाली वस्तुओं के निर्यात पर भी रोक लगा दी गई. ऐसे में पश्चिमी देशों को डर है कि अगर भविष्य में आपूर्ति बाधित हुई, तो उनकी अर्थव्यवस्था और सुरक्षा दोनों खतरे में पड़ सकती हैं.

ऑस्ट्रेलिया के साथ अमेरिका का नया गठबंधन

इस दिशा में ऑस्ट्रेलिया पहले ही एक कदम आगे बढ़ा चुका है. पिछले साल अक्टूबर में ऑस्ट्रेलिया ने अमेरिका के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया था, जिसका मकसद चीन के प्रभुत्व को कम करना था. इस समझौते के तहत 8.5 अरब डॉलर की परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है. ऑस्ट्रेलिया अपने यहां रणनीतिक रिजर्व तैयार कर रहा है ताकि रेयर अर्थ और लिथियम जैसे खनिजों की सप्लाई बिना किसी रुकावट के जारी रहे. ऑस्ट्रेलिया की राजधानी कैनबरा से मिली जानकारी के मुताबिक, इस पहल में अब यूरोप, जापान, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर जैसे देशों ने भी अपनी रुचि दिखाई है.
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