Monday, November 9, 2026
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नशों की पंजाब में तस्करी रोकने के लिए संबंधित राज्यों के साथ मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स बेहतर नियमों और बिक्री की निगरानी का मुद्दा उठाया जा रहा है।

चंडीगढ़, 13 सितंबर:

 

पिछले कुछ वर्षों के दौरान पंजाब में पाकिस्तान से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा के जरिए होने वाली नशों की तस्करी के खिलाफ की गई सख्त कार्रवाई के चलते नशा तस्करी के तरीकों में बदलाव आया है और अब फार्मास्यूटिकल ड्रग्स पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। पंजाब में नशा-रोधी कानूनों को लागू करने के संबंध में अब हेरोइन की लत के बजाय फार्मास्यूटिकल ड्रग्स की लत एक प्रमुख चुनौती के रूप में उभर रही है।

पंजाब पुलिस के प्रवक्ता ने बताया कि सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और पंजाब पुलिस द्वारा पाकिस्तान से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थों की तस्करी से निपटने के लिए अपनाई गई बहु-स्तरीय प्रतिक्रिया के चलते पंजाब में जमीनी स्तर पर हेरोइन की उपलब्धता में तेजी से गिरावट आई है। पंजाब पुलिस द्वारा 09 एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात किए जा रहे हैं, जिनमें से 03 ‘बाज की आंख’ सिस्टम 9 अगस्त, 2025 से अमृतसर, तरन तारन और फिरोजपुर में पहले ही कार्यशील हैं, जो इन ड्रोन का पहले ही पता लगाकर उन्हें जाम कर देते हैं। लंबे समय तक चलने वाले मोबाइल ड्रोन डिटेक्शन प्लेटफॉर्म ‘ड्रोन सेंस डी200 प्रो’ की 03 यूनिटें 03-09-2026 से सीमावर्ती जिलों में रणनीतिक स्थानों पर तैनात की गई हैं, जो तत्काल प्रतिक्रिया सुनिश्चित करती हैं। यह सिस्टम ड्रोन से संबंधित गतिविधियों और खेप गिराने वाले स्थानों की सटीक जानकारी उपलब्ध कराता है, जिससे समय पर कार्रवाई संभव हो जाती है। जमीनी स्तर पर तत्काल कार्रवाई के लिए 147 पुलिस कर्मचारियों के साथ-साथ 52 ड्रोन रिस्पांस टीमों (डीआरटी) द्वारा सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के साथ निकट तालमेल में काम किया जा रहा है। ये टीमें ड्रोन अलर्ट मिलने पर संदिग्ध खेप गिराने वाले स्थानों तक पहुंचती हैं, तलाशी लेती हैं और गिराई गई खेपों को प्राप्त करने वाले व्यक्तियों को गिरफ्तार करती हैं। इन कार्रवाइयों में सहायता के लिए 585 स्थानों पर 2367 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और 600 पुलिस कर्मचारियों वाले 64 सेकेंड लाइन ऑफ डिफेंस नाकों की व्यवस्था की गई है।

प्रवक्ता ने आगे बताया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में ‘विलेज डिफेंस कमेटियों’ (वीडीसी) को ‘ड्रोन रिस्पांस टीमों’ के साथ जोड़ा गया है। सीमावर्ती क्षेत्रों में वीडीसी पुलिस के लिए ‘आंख और कान’ के रूप में काम करती हैं। ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ अभियान के तहत 01-03-2025 से अब तक लगभग 80,000 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है और 486 ड्रोन बरामद किए गए हैं। नशा तस्करी नेटवर्क के आर्थिक आधार को तोड़ने के लिए वित्तीय जांच का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसके तहत 336 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति फ्रीज की गई है। नशों से संबंधित जानकारी देने के लिए बनाई गई इनामी नीति के तहत प्रत्येक ड्रोन की बरामदगी पर 25,000 रुपये का नकद इनाम दिया जाता है और मौजूदा वर्ष के दौरान इस नीति के तहत लगभग 2 करोड़ रुपये की राशि वितरित की जा चुकी है।

पंजाब पुलिस के प्रवक्ता ने कहा कि एंटी-ड्रोन तकनीक, रैपिड रिस्पांस टीमें, बीएसएफ के साथ तालमेल, सामुदायिक सतर्कता, सीसीटीवी निगरानी, नाके, खुफिया जानकारी के आधार पर गिरफ्तारियां, वित्तीय रूप से कमजोर करने, पुनर्वास और रोकथाम पर आधारित पंजाब पुलिस की बहु-स्तरीय प्रतिक्रिया प्रणाली के चलते अंतरराष्ट्रीय सीमा पार से तस्करी किए जाने वाले नशों की पंजाब में जमीनी स्तर पर उपलब्धता में तेजी से गिरावट आई है। इसके साथ ही, नए रुझान दर्शाते हैं कि दूसरे राज्यों से तस्करी किए जाने वाले फार्मास्यूटिकल ड्रग्स पंजाब में नशों से संबंधित कानून लागू करने के क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण चुनौती के रूप में उभर रहे हैं।

पंजाब में फार्मास्यूटिकल ड्रग्स की जब्ती से संबंधित आंकड़ों के अनुसार, अधिकांश फार्मास्यूटिकल ड्रग्स पंजाब में नहीं बनाए जाते और हिमाचल प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली आदि राज्यों में बनाए जाते हैं।

प्रवक्ता ने बताया कि अन्य राज्यों से पंजाब में बड़ी मात्रा में फार्मास्यूटिकल ड्रग्स आ रही हैं। वर्ष 2025 से अब तक उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, दिल्ली और हिमाचल सहित अन्य राज्यों से जुड़ी खेपों में से 11.54 लाख नशीली गोलियां/कैप्सूल बरामद किए गए हैं। एक अनुमान के अनुसार, पंजाब में मिलने वाली फार्मास्यूटिकल ड्रग्स में से 80 प्रतिशत गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली आदि राज्यों से आ रही हैं। यह उस पुराने रुझान के विपरीत है, जब 80 प्रतिशत नशीले पदार्थ पाकिस्तान से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा के जरिए पंजाब में तस्करी करके लाए जाते थे।

पंजाब पुलिस के प्रवक्ता ने आगे कहा कि फार्मास्यूटिकल ड्रग्स के इस्तेमाल के उभरते रुझान से निपटने के लिए अंतरराज्यीय तालमेल बेहद जरूरी है। निर्माताओं, वितरकों और संगठित फार्मास्यूटिकल ड्रग नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई के लिए उन राज्यों के साथ लगातार समन्वय बनाकर काम करने की आवश्यकता है, जहां से ये नशीले पदार्थ बनते हैं या जिनके जरिए इनकी तस्करी होती है। पंजाब पुलिस द्वारा संबंधित राज्यों के समक्ष यह मामला उठाया जाएगा, ताकि निर्माण इकाइयों के संबंध में बेहतर नियम सुनिश्चित किए जा सकें और सभी फार्मास्यूटिकल ड्रग्स की बिक्री, खरीद और तस्करी पर लगातार कड़ी नजर रखी जा सके तथा इन नशों को पंजाब आने से रोका जा सके।

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