Sunday, November 8, 2026
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आप सरकार के साढ़े चार सालों के कार्यकाल के दौरान पंजाब में एक भी पेपर लीक नहीं हुआ: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान

चंडीगढ़; 3 अगस्त 2026:

 

पंजाब विधानसभा ने आज जेन-ज़ी (नौजवान पीढ़ी) के साथ दृढ़ता से खड़े होते हुए और देश के नौजवानों पर हो रहे जुल्मों के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए देश भर में एक के बाद एक पेपर लीक के मामलों के खिलाफ जुबानी वोट से निंदा प्रस्ताव पारित किया। प्रस्ताव पर बहस को समेटते हुए और फिर मीडिया को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के राज में बार-बार हो रहे पेपर लीक के मामलों ने करोड़ों छात्रों के सपनों को चकनाचूर कर दिया है, जबकि इंसाफ मांगने वालों को जवाबदेही की बजाय अश्रु गैस के गोलों, पैलेट गनों और पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा।

मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि पंजाब सरकार यह निंदा प्रस्ताव प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजेगी, जिसमें केंद्र को पेपर लीक के मामलों को रोकने और देश की शिक्षा प्रणाली की मजबूती के लिए सख्त कदम उठाने की अपील की जाएगी। उल्लेखनीय है कि प्रस्ताव पर बहस के दौरान कांग्रेस ने सदन से वाकआउट कर दिया।

देश में बार-बार हो रहे पेपर लीक के मामलों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पर विधानसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “देश को विश्वगुरु बनाने का दावा करने वालों ने देश भर में एक के बाद एक हो रहे पेपर लीक के मामलों को रोकने में अपनी नाकामी से शिक्षा प्रणाली का मजाक बना दिया है। पेपर लीक यानी परीक्षा पत्र की बिक्री, परीक्षार्थियों के सपनों को तोड़ देती है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण यह है कि नीट परीक्षा के 22 उम्मीदवारों ने निराशा में खुदकुशी तक कर ली। उन्होंने कहा कि जब से (साल 2014) भाजपा सरकार ने सत्ता संभाली है, देश में 93 पेपर लीक हो चुके हैं।”

पेपर लीक से संबंधित आंकड़ों का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “2019 से 2024 के बीच पेपर लीक के ऐसे मामलों की संख्या 65 थी और सबसे ज्यादा पेपर लीक भाजपा के नेतृत्व वाली राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों की सरकारों में हुए। प्रधानमंत्री, जो छात्रों को परीक्षाओं में बैठने के नुस्खे बताते रहते हैं, पेपर लीक रोकने में नाकाम रहे हैं। उस प्रधानमंत्री से और क्या उम्मीद की जा सकती है जिसकी अपनी डिग्री का ही कोई पता नहीं है।”

छात्रों के साथ किए जा रहे व्यवहार पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा, “ये नेता अपने निजी राजनीतिक हितों के लिए स्कूल पाठ्यक्रम को बदल रहे हैं, जो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। देश के छात्रों ने प्रधानमंत्री को केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लेने के लिए मजबूर कर दिया, जो देश में पेपर लीक रोकने में पूरी तरह असफल रहे। छात्रों के खिलाफ अश्रु गैस, जोरदार पुलिस बल, पैलेट गनों और अन्य पैतरों के इस्तेमाल के दौरान केंद्र सरकार की धौंसशाही बेहद निंदनीय है।”

इस मुद्दे पर बात जारी रखते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पूरी दुनिया में पैलेट गनों पर पाबंदी है, लेकिन केंद्र सरकार ने निर्दोष छात्रों के खिलाफ बेरहमी से इनका इस्तेमाल किया है। परीक्षाओं को निष्पक्षता से करवाने का वादा करने की बजाय, प्रधानमंत्री लोगों को गुमराह करने के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों का वादा कर रहे हैं। यह सिस्टम का मजाक बनाना नहीं तो और क्या है कि केंद्र सरकार परीक्षाओं के सुचारू संचालन के लिए रक्षा सेवाओं का सहयोग ले रही है।”

छात्रों और उनके परिवारों पर पेपर लीक के पड़ने वाले प्रभावों को उजागर करते हुए उन्होंने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पेपर लीक होने के कारण छात्रों को घोर संताप झेलना पड़ता है। ऐसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र अपने परिवारों की उम्मीद होते हैं। हालांकि, जब ऐसे पेपर लीक के नाम पर अमीर लोगों को बेचे जाते हैं, तो आम छात्रों/परीक्षार्थियों के सपने चकनाचूर हो जाते हैं। ये नेता देश के नौजवानों के भविष्य से खेल रहे हैं, जिसके कारण जेन-ज़ी को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा और उन पर बहुत अत्याचार हुए।”

मौजूदा परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “ऐसे पेपर लीक देश की शिक्षा प्रणाली पर सवालिया निशान खड़ा करते हैं और इसीलिए हमारे देश की डिग्रियों की विदेशों में कोई कदर नहीं है। इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की बजाय केंद्र सरकार उनका बचाव कर रही है। प्रधानमंत्री छात्रों को परीक्षाओं की तैयारी करना सिखाते हैं, लेकिन उन्होंने अपनी सरकार अधीन आने वाली संस्थाओं को कभी यह नहीं सिखाया कि पारदर्शिता, निष्पक्षता और सुरक्षा के साथ परीक्षाएं कैसे करवाई जाती हैं।”

केंद्र के समूचे कार्यकाल के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा, “केंद्र सरकार की विदेश नीति देश के हितों और अखंडता की रक्षा में बुरी तरह असफल रही है। वाशिंगटन में व्हाइट हाउस में बैठे लोग देश की नीतियों में दखल दे रहे हैं। यह देश में बन रहे बेहद घिनौने और बुरे हालातों की झलक है क्योंकि केंद्र सरकार अपनी ड्यूटी निभाने में पूरी तरह फेल हो चुकी है।”

बहस के बाद अपनी सरकार की ओर से की गई कार्रवाई के बारे में बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “पंजाब सरकार आज विधानसभा में यह निंदा प्रस्ताव लेकर आई है। पारित किया गया यह प्रस्ताव प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा जाएगा ताकि देश की शिक्षा प्रणाली में बार-बार हो रही दखलंदाजी और नीट जैसी परीक्षाओं के पेपर लीक होने का मुद्दा उनके ध्यान में लाया जा सके।”

जांच के बावजूद बार-बार होते पेपर लीक का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “इन पेपरों के लीक होने के कारण करोड़ों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। हर बार सीबीआई जांच के आदेश दिए जाते हैं, लेकिन किसी को सजा नहीं मिलती। यह महज एक रस्म बनकर रह गया है। अब भी प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि मामले का फैसला फास्ट-ट्रैक अदालतों में किया जाएगा। इसका मतलब है कि पेपर लीक होते रहेंगे और केवल केसों के फैसले बाद में होते रहेंगे।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “आज परीक्षाएं करवाने के लिए फौज की मदद ली जा रही है। इससे बड़ी त्रासदी और क्या हो सकती है? हम विश्वगुरु बनने के दावे करते हैं, लेकिन हम अपनी परीक्षाएं भी सही ढंग से नहीं करवा पा रहे। बार-बार पेपर लीक होने से जिन छात्रों ने भारत से ईमानदारी से एमबीबीएस, वेटरनरी, इंजीनियरिंग और अन्य पेशेवर डिग्रियां हासिल भी की हैं, जब वे विदेश जाते हैं तो उन्हें दोबारा पढ़ने या नए टेस्ट पास करने के लिए कहा जाता है। विदेशी संस्थानों और कंपनियों का कहना है कि उन्हें हमारी परीक्षा प्रणाली पर भरोसा नहीं है। फिर भी ये लोग भारत को विश्वगुरु बनाने की बातें करते हैं।”

पीड़ित छात्रों के लिए इंसाफ की मांग करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “हम इस पूरे घटनाक्रम की पुरजोर निंदा करते हैं। अपने हकों के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर दर्ज किए गए केस तुरंत वापस लिए जाएं। केंद्र सरकार के वादे मुताबिक खुदकुशी करने वाले छात्रों के परिवारों को 1-1 करोड़ रुपए का मुआवजा दिया जाए। भारत सरकार को यह भी यकीनी बनाना चाहिए कि ऐसी घटनाएं भविष्य में कभी न दोहराई जाएं।”

बहस के दौरान कांग्रेस के रवैये पर निराशा जताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “कांग्रेस को छोड़कर सदन के लगभग हर सदस्य ने निंदा प्रस्ताव का समर्थन किया। कांग्रेस ने बहस का बहिष्कार करने का रास्ता चुना। यह बहुत अफसोसजनक है कि जब देश भर के छात्र अपने भविष्य के लिए लड़ रहे हैं तो कांग्रेस बार-बार होते पेपर लीक जैसे अहम मुद्दे पर भी उनके साथ नहीं खड़ी हुई। उन्हें राजनीति से ऊपर उठकर नौजवानों के मुद्दे पर केंद्र के खिलाफ बोलने का मौका मिला था, लेकिन उन्होंने वाकआउट करना मुनासिब समझा।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “आज जब मैं विधानसभा में बोल रहा था तो विरोधी दल की सीटें खाली पड़ी थी। यह 2027 की एक झलक है। इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर बहस में हिस्सा लेने की बजाय उन्होंने कार्रवाई का बहिष्कार किया। एक तरफ उनके नेता शिक्षा से संबंधित मुद्दों पर प्रधानमंत्री के आवास के बाहर प्रदर्शन करते हैं और दूसरी तरफ जब उन्हें सदन में उसी मुद्दे पर बहस करने का मौका मिलता है तो वे वाकआउट कर जाते हैं।”

परीक्षाओं के मामले में पंजाब के रिकॉर्ड को स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारी सरकार के पिछले चार सालों से ज्यादा के कार्यकाल के दौरान पंजाब में पेपर लीक की एक भी घटना नहीं हुई। कुछ परीक्षाओं के दौरान नकल के मामले सामने आए थे, लेकिन वे मामले सरकार द्वारा खुद ही पकड़े गए थे। चाहे किसी ने नकल करने के लिए डिजिटल उपकरणों, स्कैनिंग पेन या किसी अन्य तरीके का इस्तेमाल किया हो, सख्त कार्रवाई की गई, एफआईआर दर्ज की गईं और दोषियों को जेल भेजा गया। नकल करना और पेपर लीक होना, दो अलग-अलग बातें हैं और विरोधी दल जानबूझकर इन दोनों को उलझाने की कोशिश कर रहा है।”

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