Monday, November 9, 2026
HomeLatest Newsमहिला आरक्षण नहीं असली मुद्दा परिसीमन, सोनिया गांधी ने लेख के जरिए...
spot_img

महिला आरक्षण नहीं असली मुद्दा परिसीमन, सोनिया गांधी ने लेख के जरिए सरकार की मंशा पर उठाए सवाल

सोनिया गांधी ने कहा कि महिला आरक्षण को लेकर कोई विवाद नहीं है.

महिला आरक्षण अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों पर विचार और उन्हें पारित करने को लेकर संसद के 3 दिवसीय स्पेशल सत्र से पहले जोरदार सियासी माहौल बना हुआ है. विपक्षी दल इस सत्र के आयोजन की टाइमिंग को लेकर निशाना साध रहे हैं. अब कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी आलोचना की है, उन्होंने एक अखबार में लिखे अपने लेख में कहा कि महिला आरक्षण मुद्दा नहीं है, असली मुद्दा तो परिसीमन है. इसे 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले ही लागू करने की मांग की गई थी, लेकिन तब इसे सरकार ने लागू नहीं किया था.
सोनिया गांधी ने एक अखबार के लिए लिखे लेख में कहा, “प्रधानमंत्री विपक्षी दलों से उन विधेयकों का समर्थन करने की अपील कर रहे हैं, जिन्हें सरकार संसद के एक स्पेशल सत्र के जरिए ठीक उस समय जब तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनावी अभियान अपने चरम पर होगा, जल्दबाजी में पारित करवाना चाहती है. इस तरह की जल्दबाजी की सिर्फ एक ही बड़ी वजह हो सकती है, और वह है राजनीतिक लाभ उठाना साथ ही विपक्ष को बचाव की मुद्रा में धकेल देना.

सारी कवायद परिसीमन को लेकरः सोनिया

उनका कहना है कि केंद्र सरकार चुनाव से ठीक पहले स्पेशल सत्र बुलाने में जल्दबाजी में है ताकि विपक्ष को बचाव की मुद्रा में लाया जा सके. खास बात यह है कि इस प्रक्रिया के पीछे की सारी कवायद परिसीमन को लेकर है न कि महिला आरक्षण. परिसीमन का मामला ही असली मुद्दा है. उन्होंने कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ तो पहले ही पारित हो चुका है. जनगणना के बिना अचानक इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है?
संघ और राज्यों के बीच संघीय संतुलन बिगड़ने पर चिंता जताते हुए सोनिया गांधी ने कहा, “जल्दबाजी के साथ की जा रही इस प्रक्रिया से संघीय संतुलन के बिगड़ने और दक्षिणी राज्यों के कमजोर होने का खतरा रहेगा. किसी भी प्रक्रिया में पारदर्शिता मायने रखती है. लोकतंत्र सिर्फ हिसाब-किताब नहीं चलता है बल्कि निष्पक्षता भी अहम मायने रखता है.

सरकार के U-turn पर सवालः सोनिया

उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण को लेकर कोई विवाद नहीं है. यह साल 2023 में ही पास हो गया था. महिला आरक्षण को लागू करने को जनगणना और परिसीमन से जोड़ा गया, लेकिन विपक्ष ने इसका जमकर विरोध किया था. विपक्ष ने साल 2024 में लोकसभा चुनाव से पहले से ही लागू करने की मांग थी, लेकिन सरकार ने तब इसे स्वीकार नहीं किया था. अब सरकार 2029 से लागू करने की बात कर रही है. महज 30 महीने में U-turn पर सवाल उठ रहे हैं.
तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में मतदान से पहले सत्र बुलाए जाने पर सोनिया गांधी ने कहा कि विपक्ष की मांग थी कि 29 अप्रैल के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए, लेकिन सरकार ने इसे ठुकरा दिया. एजेंडा साझा किए बिना ही 16 अप्रैल से स्पेशल सेशन बुलाया गया, जो इसकी पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है.

परिसीमन से दक्षिण को नुकसानः सोनिया गांधी

जनगणना में देरी पर भी सवाल उठाते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि 2021 की जनगणना में देरी की गई जिससे 10 करोड़ लोग खाद्य सुरक्षा लाभ से वंचित हो गए.
परिसीमन को लेकर आशंका जताते हुए सोनिया ने कहा कि परिसीमन के दौरान लोकसभा सीट बढ़ोतरी में राजनीतिक संतुलन जरूरी हो गया है. परिसीमन को लेकर दक्षिण और छोटे राज्यों को नुकसान की आशंका दिख रही है. परिसीमन प्रक्रिया जल्दबाजी में करना संविधान पर हमला है. लोकसभा की संख्या बढ़ाने से संबंधित कोई भी परिसीमन राजनीतिक रूप से किया जाना चाहिए न कि केवल अंकों के आधार यह पूरी तरह से न्यायसंगत हो.
उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना पर भी सरकार की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं. सरकार का असली एजेंडा परिसीमन, महिला आरक्षण सिर्फ नैरेटिव सेट करने के लिए है.
spot_img
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

Most Popular

Recent Comments

spot_img