Sunday, November 8, 2026
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कप्तानी के मोर्चे पर MS Dhoni का दबदबा अभी भी बरकरार, दिग्गजों की सूची में कई बड़े नाम

T20 विश्व कप का मंच हमेशा से रोमांच, रिकॉर्ड और यादगार कप्तानी फैसलों का गवाह रहा है।

जैसे-जैसे एक बार फिर यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट चर्चा में है, वैसे-वैसे उन कप्तानों के आंकड़े भी सुर्खियों में हैं, जिन्होंने इस फॉर्मेट के सबसे बड़े इवेंट में सबसे ज्यादा बार अपनी टीम की अगुआई की है।
इस सूची में भारत के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी सबसे ऊपर हैं। धोनी ने 2007 से 2016 तक खेले गए टी20 विश्व कप मुकाबलों में कुल 33 मैचों में कप्तानी की। इस दौरान भारत को 20 जीत मिलीं, जबकि 11 मैचों में हार का सामना करना पड़ा। एक मुकाबला टाई रहा और एक बेनतीजा समाप्त हुआ। धोनी की कप्तानी का सबसे सुनहरा पल 2007 में आया, जब भारत ने पहली बार टी20 विश्व कप का खिताब अपने नाम किया और इस फॉर्मेट में एक नई क्रिकेट संस्कृति की शुरुआत हुई।
दूसरे स्थान पर न्यूजीलैंड के भरोसेमंद कप्तान केन विलियमसन हैं। उन्होंने 2016 से 2024 के बीच टी20 विश्व कप में 21 मैचों में कप्तानी की और इनमें से 14 मुकाबले जीतने में सफलता पाई। सात मैचों में उन्हें हार मिली। शांत स्वभाव और रणनीतिक सोच के लिए पहचाने जाने वाले विलियमसन अब कप्तानी की भूमिका से हट चुके हैं, लेकिन उनका रिकॉर्ड आज भी प्रभावशाली माना जाता है।
वेस्टइंडीज के करिश्माई कप्तान डेरेन सैमी का नाम भी इस सूची में खास जगह रखता है। सैमी ने 2012 से 2016 के बीच 18 मैचों में टीम की कमान संभाली। इस दौरान वेस्टइंडीज ने 11 जीत दर्ज कीं, जबकि 5 मैचों में हार झेली। एक मुकाबला टाई और एक बेनतीजा रहा। उनकी कप्तानी में वेस्टइंडीज ने टी20 क्रिकेट में आक्रामक और निडर खेल की अलग पहचान बनाई।
पाकिस्तान के स्टार बल्लेबाज बाबर आजम इस सूची में चौथे स्थान पर हैं। उन्होंने 2021 से 2024 के बीच 17 टी20 विश्व कप मैचों में कप्तानी की, जिनमें से 11 में जीत और 5 में हार मिली। एक मैच टाई रहा। हालांकि बाबर अब पाकिस्तान के कप्तान नहीं हैं, लेकिन टीम में उनकी मौजूदगी आज भी बेहद अहम मानी जाती है।
सूची में पांचवें नंबर पर इंग्लैंड के पूर्व कप्तान पॉल कॉलिंगवुड हैं। उन्होंने 2007 से 2010 के बीच 17 मैचों में कप्तानी की। इस दौरान इंग्लैंड को 8 जीत और 8 हार मिलीं, जबकि एक मुकाबला बिना नतीजे के समाप्त हुआ।
टी20 विश्व कप के ये आंकड़े साफ दिखाते हैं कि कप्तानी सिर्फ मैदान पर फैसले लेने तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह दबाव में टीम को संभालने, युवाओं को निखारने और बड़े मैचों में सही रणनीति अपनाने की कला भी है। आने वाले टूर्नामेंट में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कोई नया कप्तान इन दिग्गजों की सूची को चुनौती दे पाता है या नहीं।

 

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