Monday, November 9, 2026
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नशा मुक्ति अभियान में प्राइवेट साइकेट्रिस्ट की मदद लेगी सरकार, उनसे 2 घंटे लिया जाएगा काम, मिलेगा 1500 रुपए प्रति घंटा

पंजाब में नशामुक्ति अभियान में सरकार प्राइवेट साइकेट्रिस्ट की मदद लेगी।

पंजाब में नशामुक्ति अभियान में सरकार प्राइवेट साइकेट्रिस्ट की मदद लेगी। उनसे 2 घंटे काम लिया जाएगा और उसके एवज में उन्हें 1500 रुपए प्रति घंटे के हिसाब से भुगतान किया जाएगा। उन्हें ब्यूप्रोनॉरफिन दवा देने के राइट भी दिए जाएंगे, जिससे उनकी इंकम बढ़ेगी। रविवार को एसोसिएशन ऑफ साइकेट्रिस्ट के साथ मीटिंग के बाद सेहत मंत्री डा. बलबीर सिंह ने यह ऐलान किया। इस मौके पर सांसद संजीव अरोड़ा, प्रिंसीपल सैक्रेटरी हैल्थ कुमार राहुल, नशा विरोधी अभियान के नोडल अधिकारी डा. बसंत गर्ग, डायरैक्टर हैल्थ डा. हितेंद्र कौर, मैंटल हैल्थ एंड डी-एडिक्शन के स्टेट प्रोग्राम अफसर डा. संदीप भोला भी मौजूद रहे।
सरकार के पास 55 साइकेट्रिस्ट, हमें इलाज के लिए ज्यादा चाहिए
सेहत मंत्री ने कहा कि सरकार के पास सीमित संख्या में 55 साइकेट्रिस्ट हैं, जबकि नशे के खिलाफ लड़ाई के लिए हमें ज्यादा साइकेट्रिस्ट चाहिए। इसलिए प्राइवेट साइकेट्रिस्ट से टाईअप करने का फैसला हुआ है। वह अपने-अपने केंद्रों में सुबह शाम काम करेंगे, लेकिन दो घंटे सरकार के लिए काम करेंगे। नर्सिग कालेजों में नशामुक्ति के इलाज के लिए करीब 2000 बैड मरीजों के लिए रखे गए हैं। प्राइवेट साइकेट्रिस्ट इन केंद्रों में जाकर मरीजों का ट्रीटमैंट एडवाइज करेंगे। नर्सिग स्टूडैंटस को ट्रेंड करके यहां पर तैनात किया जा रहा है।
हर जेल के साथ भी एक साइकेट्रिस्ट अटैच किया जाएगा। सेहत मंत्री ने कहा कि इंडस्ट्री को भी आह्वान किया कि वह नशामुक्ति में योगदान के लिए एक-एक सैंटर को अडॉप्ट करें। सेहत मंत्री ने कहा कि 23 जिलों में पुलिस के साथ मिलकर 23 वैरी सिक्योर सैंटर खोले जा रहे हैं, जिसमें हार्डकोर ड्रग एडिक्ट मरीजों का सिक्योरिटी में नशामुक्ति का इलाज होगा। प्राइवेट डाक्टरों के पास वही मरीज भेजे जाएंगे, जो रिफार्म हो चुके हों या नशा छोड़ने के लिए सैल्फ मोटिवेटिड हों।
नशा पीड़ितों को आम डाक्टरों की बजाय मनोचिकित्सकों के पास भेजा जाए : सांसद अरोड़ा
सांसद संजीव अरोड़ा ने नशीली दवाओं के खतरे को रोकने में मनोचिकित्सकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने राज्य भर के शैक्षणिक संस्थानों में मनोचिकित्सकों को शामिल करते हुए जन जागरूकता अभियान के महत्व पर जोर दिया। अरोड़ा ने कहा कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों की सलाह पर ध्यान देने की अधिक संभावना है, भले ही वे बड़ों या शिक्षकों के मार्गदर्शन को अनदेखा करें। अरोड़ा ने नशीली दवाओं की लत के इलाज में एक व्यविस्थत बदलाव की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में भर्ती नशीली दवाओं के आदी लोगों को सामान्य चिकित्सकों के बजाय मनोचिकित्सकों के पास भेजा जाना चाहिए।
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