Sunday, November 8, 2026
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भगोड़े नीरव मोदी को लंदन हाईकोर्ट से बड़ा झटका, 10वीं बार जमानत याचिका खारिज

नीरव मोदी ने अपने प्रत्यर्पण पर फैसला आने तक लंदन उच्च न्यायालय से जमानत मांगी थी।

भारत द्वारा भगोड़ा घोषित किए गए नीरव मोदी की 10वीं जमानत याचिका गुरुवार को लंदन में हाईकोर्ट ऑफ जस्टिस की किंग्स बेंच डिवीजन ने खारिज कर दी। नीरव मोदी वहां की जेल में है और 13,000 करोड़ रुपये के पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) धोखाधड़ी मामले में मेहुल चोकसी के साथ भारत में वांछित है।
अधिकारियों ने बताया कि नीरव मोदी ने लंदन उच्च न्यायालय में अपने प्रत्यर्पण अनुरोध पर निर्णय आने तक जमानत मांगी है। सीबीआई ने यहां एक बयान में कहा कि नीरव मोदी की ताजा जमानत याचिका लंदन उच्च न्यायालय के किंग्स बेंच डिवीजन ने खारिज कर दी है। यह उनकी 10वीं जमानत याचिका थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया।

क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस ने आपत्ति जताई।

उच्च न्यायालय की दलीलों का क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस के वकीलों ने कड़ा विरोध किया, जिनकी सहायता के लिए एक मजबूत सीबीआई टीम भी मौजूद थी, जो इस उद्देश्य के लिए लंदन गई थी। नीरव मोदी (55) 19 मार्च 2019 से ब्रिटेन की जेल में है। उस पर घोटाले की कुल रकम में से 6498.20 करोड़ रुपये गबन करने का आरोप है। एजेंसी ने कहा कि उसके प्रत्यर्पण को ब्रिटेन के उच्च न्यायालय ने भारत सरकार के पक्ष में पहले ही मंजूरी दे दी है।

10वीं जमानत अर्जी खारिज

एजेंसी ने कहा कि ब्रिटेन में हिरासत में लिए जाने के बाद से यह उनकी 10वीं जमानत याचिका थी, जिसका सीबीआई ने क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस के माध्यम से सफलतापूर्वक बचाव किया था। पीएनबी धोखाधड़ी मामले में सह-आरोपी नीरव मोदी और मेहुल चोकसी को बेल्जियम में अधिकारियों ने गिरफ्तार कर लिया, जहां वे इलाज के लिए गए थे।

13 हजार करोड़ की धोखाधड़ी

नीरव मोदी पर फर्जी वचन पत्र और विदेशी साख पत्रों का इस्तेमाल कर पीएनबी बैंक से 13,000 करोड़ रुपये से अधिक का गबन करने का आरोप है। मुंबई में पीएनबी की ब्रैडी हाउस शाखा के अधिकारियों ने बिना किसी स्वीकृत सीमा या नकद मार्जिन के तथा बैंक की केंद्रीय प्रणाली में प्रविष्टियां किए बिना, ताकि किसी भी प्रकार की जांच से बचा जा सके, अपनी फर्मों को वचन पत्र और विदेशी ऋण पत्र जारी कर दिए।
एलओयू एक गारंटी है जो किसी बैंक द्वारा अपने ग्राहक की ओर से किसी विदेशी बैंक को दी जाती है। यदि ग्राहक विदेशी बैंक को भुगतान नहीं करता है, तो जिम्मेदारी गारंटर पर आ जाती है। पीएनबी द्वारा जारी एलओयू के आधार पर एसबीआई मॉरीशस, इलाहाबाद बैंक हांगकांग, एक्सिस बैंक हांगकांग, बैंक ऑफ इंडिया एंटवर्प, केनरा बैंक ममना और एसबीआई फ्रैंकफर्ट ने धन उधार दिया।

एलओयू और एफएलसी के विरुद्ध बिलों की छूट

सीबीआई ने आरोप लगाया कि चूंकि आरोपी कंपनियों ने उक्त धोखाधड़ी वाले एलओयू और एफएलसी के विरुद्ध प्राप्त राशि का भुगतान नहीं किया, इसलिए पीएनबी ने विदेशी बैंकों को ब्याज सहित बकाया राशि का भुगतान कर दिया, जिन्होंने क्रेता ऋण बढ़ाया और पीएनबी द्वारा जारी किए गए धोखाधड़ी वाले एलओयू और एफएलसी के विरुद्ध बिलों को भुनाया।
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